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देहरादून में 13.4 लाख वाहन, ट्रैफिक पुलिस में 34% कमी; ‘ट्रैफिक सुनामी’ से निपटने को नागरिक मॉडल का प्रस्ताव

देहरादून।

राजधानी देहरादून में तेजी से बिगड़ती यातायात व्यवस्था को लेकर सामाजिक कार्यकर्ता अनूप नौटियाल ने पुलिस महानिदेशक दीपम सेठ को विस्तृत पत्र लिखकर “सिटिजन ट्रैफिक वॉलंटियर फोर्स” के गठन का सुझाव दिया है। उन्होंने संभावित “ट्रैफिक सुनामी” से निपटने के लिए मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी से व्यक्तिगत हस्तक्षेप की अपील भी की है।

 

पत्र में कहा गया है कि तीव्र एवं अनियोजित शहरी विस्तार, निजी वाहनों की बढ़ती संख्या, कमजोर सार्वजनिक परिवहन, अतिक्रमण, बार-बार सड़क खुदाई, खराब ट्रैफिक सिग्नल, पर्यटन दबाव, वीआईपी मूवमेंट और धरना-प्रदर्शनों के कारण देहरादून अभूतपूर्व यातायात दबाव झेल रहा है।

 

नौटियाल के अनुसार, ट्रैफिक जाम अब केवल असुविधा नहीं बल्कि गंभीर प्रशासनिक चुनौती बन चुका है, जिसका असर मानसिक स्वास्थ्य, आपातकालीन सेवाओं की प्रतिक्रिया समय, पर्यावरण और आर्थिक उत्पादकता पर पड़ रहा है।

 

13.4 लाख वाहन, केवल 269 समर्पित ट्रैफिक कर्मी

 

आरटीआई से प्राप्त जानकारी के अनुसार जून 2025 तक देहरादून जिले (देहरादून, ऋषिकेश, विकासनगर) में कुल 13,42,528 वाहन पंजीकृत हैं। इनमें 10,66,786 वाहन देहरादून, 2,02,055 ऋषिकेश और 73,687 विकासनगर में दर्ज हैं।

 

उत्तराखंड के 13 जिलों में कुल 37,48,105 पंजीकृत वाहनों में से लगभग 36% वाहन अकेले देहरादून जिले में हैं।

 

मीडिया रिपोर्टों के हवाले से उन्होंने बताया कि वर्ष 2017 में देहरादून में 411 समर्पित ट्रैफिक पुलिसकर्मी थे, जो घटकर वर्तमान में 269 रह गए हैं — यानी आठ वर्षों में 34% की कमी। इस प्रकार वर्तमान में एक ट्रैफिक पुलिसकर्मी पर औसतन लगभग 5,000 वाहनों का दायित्व है।

 

“उत्तराखंड ट्रैफिक सारथी” मॉडल का प्रस्ताव

 

नौटियाल ने “उत्तराखंड ट्रैफिक सारथी” नाम से नागरिक-केंद्रित मॉडल प्रस्तावित किया है। इसके तहत इच्छुक नागरिकों का पंजीकरण व सत्यापन कर उन्हें मूलभूत प्रशिक्षण दिया जाए और अप्रैल, मई व जून जैसे उच्च यातायात महीनों में ट्रैफिक पुलिस की निगरानी में तैनात किया जाए।

 

उन्होंने स्पष्ट किया कि यह स्वयंसेवी कानून प्रवर्तन का विकल्प नहीं होंगे, बल्कि पैदल यात्रियों को मार्गदर्शन, कतार प्रबंधन और चौराहों पर यातायात प्रवाह में सहयोग कर “फोर्स मल्टीप्लायर” की भूमिका निभाएंगे।

 

नौटियाल ने कहा,

 

“13.4 लाख से अधिक पंजीकृत वाहनों और केवल 269 समर्पित ट्रैफिक पुलिस कर्मियों के साथ व्यवस्था पर अत्यधिक दबाव है। यदि नागरिक निगरानी में सहयोग को तैयार हैं, तो प्रशासन को इसे संस्थागत रूप देना चाहिए।”

 

उन्होंने स्वयं अप्रैल, मई और जून 2026 में प्रत्येक माह एक दिन आठ घंटे स्वेच्छा से सेवा देने की भी पेशकश की है।

 

मुख्यमंत्री से संस्थागत सुदृढ़ीकरण की मांग

 

नौटियाल ने मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी से अनुरोध किया है कि आगामी चारधाम यात्रा और पर्यटन सीजन को देखते हुए पुलिस बल को पर्याप्त मैनपावर, उपकरण और लॉजिस्टिक संसाधनों से सशक्त किया जाए।

 

उन्होंने कहा कि बढ़ते वाहनों, वीआईपी मूवमेंट और सार्वजनिक आयोजनों के बीच प्रभावी ट्रैफिक प्रबंधन बिना संस्थागत सुदृढ़ीकरण के संभव नहीं है।

 

उन्होंने पूर्व में “उत्तराखंड ट्रैफिक मैनेजमेंट आयोग” के गठन और ग्रेडेड रिस्पॉन्स एक्शन प्लान (GRAP) प्रणाली लागू करने का सुझाव भी दिया था, जिस पर अभी तक मुख्यमंत्री कार्यालय से कोई जवाब नहीं मिला है।

पत्र के अंत में उन्होंने पुलिस महानिदेशक से उच्च यातायात अवधि में इस सहयोगात्मक मॉडल को पायलट प्रोजेक्ट के रूप में लागू करने पर विचार करने का अनुरोध किया है। उनका मानना है कि सहभागी दृष्टिकोण से न केवल जनशक्ति की दक्षता बढ़ेगी, बल्कि यातायात अनुशासन के प्रति जन-स्वामित्व की भावना भी सुदृढ़ होगी।

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