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वजूद ZERO, बन रहे HERO धामी सरकार में ड्रामा नहीं, सिर्फ न्याय चलता है।

वजूद ZERO, बन रहे HERO धामी सरकार में ड्रामा नहीं, सिर्फ न्याय चलता है। राजनीतिक रोटियां सेकने वालों पर कार्रवाई, दुष्यंत गौतम की तहरीर पर FIR दर्ज

देहरादून, उत्तराखंड —प्रदेश में फैलाए जा रहे कथित झूठ और भ्रामक प्रचार को लेकर भाजपा प्रदेश प्रभारी दुष्यंत गौतम की तहरीर पर पुलिस ने पूर्व विधायक सुरेश राठौर, उर्मिला सनावर सहित कई लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया है। पुलिस कार्रवाई के बाद अब आरोपियों की गिरफ्तारी के साथ सच सामने आने की बात कही जा रही है।

बीते कुछ समय से अंकिता भंडारी मामले को लेकर राज्य में सियासत सड़कों पर दिखाई दे रही है। कांग्रेस, यूकेडी और आम आदमी पार्टी पर आरोप है कि जिनका राज्य में कोई ठोस राजनीतिक वजूद नहीं है, वे इस संवेदनशील मामले को लेकर अपनी राजनीतिक रोटियां सेकने का प्रयास कर रहे हैं।

भाजपा का कहना है कि मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में सरकार ने बिना देरी किए पहले ही तीनों आरोपियों को जेल भेज दिया था। निष्पक्ष कार्रवाई का परिणाम यह है कि आरोपियों का कोई भी राजनीतिक रसूख नहीं चला और मामला पिछले तीन वर्षों से न्यायालय में विचाराधीन रहते हुए भी आरोपी जेल से बाहर नहीं आ पाए।

पार्टी सूत्रों के अनुसार, यह अपने आप में एक मिसाल है कि सरकार ने अपनी ही पार्टी से जुड़े लोगों पर भी सख्त कार्रवाई करने से कोई संकोच नहीं किया। भाजपा का कहना है कि यदि आरोपियों को बचाने का इरादा होता, तो कमजोर पैरवी के जरिए अब तक उन्हें राहत मिल चुकी होती, लेकिन धामी सरकार में ऐसा नहीं हुआ।

आरोप है कि आगामी विधानसभा चुनाव 2027 से पहले कुछ लोग इस मामले को तूल देकर राजनीतिक लाभ लेना चाहते हैं, लेकिन भाजपा के भीतर से ही यह संदेश दिया जा रहा है कि धामी सरकार में दोषियों को बचाने की कोई गुंजाइश नहीं है।

फिलहाल, दुष्यंत गौतम द्वारा सोशल मीडिया पर किए गए कथित आपत्तिजनक पोस्टों को लेकर भाजपा के पूर्व विधायक सुरेश राठौर, उर्मिला सनावर सहित कांग्रेस, आम आदमी पार्टी और उत्तराखंड क्रांति दल से जुड़े लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया गया है।

वजूद ZERO, बन रहे HERO — सेक रहे हैं राजनीतिक रोटियां!

उत्तराखंड में झूठ फैलाने वालों पर अब कानून का डंडा चला है।
भाजपा प्रदेश प्रभारी दुष्यंत गौतम की तहरीर पर
पूर्व विधायक सुरेश राठौर, उर्मिला सनावर सहित कई लोगों पर FIR दर्ज।

अंकिता भंडारी मामले को लेकर जिनका राज्य में कोई वजूद नहीं,
वही आज सड़कों पर राजनीति चमकाने निकले हैं।
कांग्रेस, AAP, UKD — सबको मुद्दा नहीं, मौका चाहिए!

 सच्चाई ये है कि
धामी सरकार ने बिना देरी 3 आरोपियों को जेल भेजा
 3 साल से आरोपी जेल में हैं
 न रसूख चला, न सिफारिश
अपनी ही पार्टी के लोग हों, तब भी कार्रवाई

सवाल पूछने वालों से सवाल —
अगर बचाना होता तो आज तक जमानत क्यों नहीं मिली?
अगर दबाव होता तो कोर्ट में राहत क्यों नहीं मिली?

 2027 चुनाव से पहले
कुछ लोग अंकिता के नाम पर राजनीतिक उल्लू सीधा करना चाहते हैं,
लेकिन साफ संदेश है —
धामी सरकार में ड्रामा नहीं, सिर्फ न्याय चलता है।

अब गिरफ्तारी होगी,
और झूठ की परत-दर-परत पोल खुलेगी।

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