Tranding

Date & Time
, |

ADS 500/50

ऋषिकेश में गंगा तट पर भक्ति और संगीत की धारा, वसंतोत्सव में उमड़ा जनसैलाब

मैथिली ठाकुर साधना, संस्कृति और युवा प्रेरणा का सशक्त प्रतीक : मुख्यमंत्री धामी

सनातन संस्कृति को वैश्विक पहचान दिलाने में ऐसे आयोजन मील का पत्थर : सीएम

ऋषिकेश | 2026

मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी आज भरत मंदिर, ऋषिकेश में आयोजित वसंतोत्सव 2026 – मैथिली ठाकुर नाइट में सम्मिलित हुए। पतित-पावनी मां गंगा के पावन तट पर आयोजित इस भव्य एवं भक्तिमय आयोजन में बड़ी संख्या में साधु-संतों, स्थानीय नागरिकों, जनप्रतिनिधियों तथा देश-प्रदेश के विभिन्न कोनों से आए श्रद्धालुओं ने सहभागिता की।

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री ने मां गंगा के श्रीचरणों में नमन करते हुए कहा कि मधुबनी की शान, भजन एवं लोकगीतों की स्वर-साधिका सुश्री मैथिली ठाकुर जैसी प्रतिभा का योगनगरी ऋषिकेश की पावन धरा पर आगमन हम सभी के लिए सौभाग्य का विषय है। उन्होंने पूज्य संतगणों एवं श्रद्धालुओं का हार्दिक स्वागत एवं अभिनंदन किया।

मुख्यमंत्री ने कहा कि गंगा तट पर आयोजित यह बसंतोत्सव संस्कृति, संगीत और आध्यात्म का अनुपम संगम है, जो लोक संस्कृति और सनातन परंपरा को जन-जन तक पहुंचाने का सशक्त माध्यम बन रहा है। उन्होंने इस भव्य आयोजन के लिए ऋषिकेश बसंतोत्सव समिति एवं आयोजकों को बधाई दी।

मुख्यमंत्री ने ऋषिकेश के ऐतिहासिक एवं आध्यात्मिक महत्व को रेखांकित करते हुए कहा कि यह भूमि सनातन संस्कृति की पुण्यस्थली रही है। सतयुग में महर्षि रैभ्य को भगवान विष्णु के दर्शन, त्रेतायुग में भगवान श्रीराम की तपस्या, भरत जी द्वारा भगवान नारायण की स्थापना तथा आदि गुरु शंकराचार्य का पूजन—यह सभी घटनाएं ऋषिकेश की आध्यात्मिक महिमा को प्रमाणित करती हैं।

मुख्यमंत्री ने कहा कि मैथिली ठाकुर ने अपनी साधना, प्रतिभा और संकल्प से यह सिद्ध किया है कि कला केवल मंच तक सीमित नहीं रहती, बल्कि समाज परिवर्तन और राष्ट्र निर्माण की प्रेरणा बनती है। आज जब अनेक युवा पश्चिमी संगीत की ओर आकर्षित हैं, तब मैथिली ठाकुर ने अपनी जड़ों से जुड़े रहते हुए मैथिली और भोजपुरी लोक संगीत को देश-विदेश तक पहुंचाया है।

उन्होंने उल्लेख किया कि वर्ष 2024 में प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी द्वारा मैथिली ठाकुर को ‘कल्चरल एंबेसडर ऑफ द ईयर’ के नेशनल क्रिएटर्स अवॉर्ड से सम्मानित किया गया, जो भारतीय लोक संस्कृति के लिए गर्व का विषय है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि शास्त्रों में गीत-संगीत को ईश्वर से संवाद का मार्ग बताया गया है। सच्चे मन से की गई स्वर-साधना कलाकार को समाज का पथ-प्रदर्शक बना देती है। मैथिली ठाकुर जैसी विभूतियां यह स्मरण कराती हैं कि भारत की आत्मा आज भी गांवों की चौपालों, मंदिरों की घंटियों, लोकगीतों की धुनों और मां गंगा की लहरों में जीवित है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में आज सनातन संस्कृति को वैश्विक पहचान मिली है। अयोध्या में श्रीराम मंदिर, काशी विश्वनाथ कॉरिडोर, महाकाल लोक तथा बद्रीनाथ-केदारनाथ धामों के पुनर्निर्माण से भारत की सांस्कृतिक विरासत विश्व पटल पर प्रतिष्ठित हुई है। इसी प्रेरणा से उत्तराखंड सरकार केदारखंड-मानसखंड मंदिर माला मिशन, हरिद्वार-ऋषिकेश कॉरिडोर, शारदा कॉरिडोर और यमुना तीर्थ पुनरुद्धार जैसी परियोजनाओं पर कार्य कर रही है।

मुख्यमंत्री ने बताया कि दून विश्वविद्यालय में “सेंटर फॉर हिन्दू स्टडीज” की स्थापना की गई है तथा गढ़वाल और कुमाऊं मंडलों में स्पिरिचुअल इकोनॉमिक ज़ोन विकसित करने की दिशा में कार्य प्रगति पर है।

मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि राज्य सरकार देवभूमि उत्तराखंड की सांस्कृतिक पहचान, सामाजिक संतुलन और मूल स्वरूप की रक्षा के लिए पूर्णतः प्रतिबद्ध है। सख्त धर्मांतरण कानून, दंगा रोधी कानून, नकल विरोधी कानून, भू-कानून, समान नागरिक संहिता (UCC) लागू करने तथा भ्रष्टाचार के विरुद्ध कठोर कार्रवाई इसी प्रतिबद्धता का प्रमाण हैं।

अंत में मुख्यमंत्री ने विश्वास व्यक्त किया कि जनसमर्थन और सहयोग से सरकार उत्तराखंड को देश का सर्वश्रेष्ठ राज्य बनाने के अपने “विकल्प रहित संकल्प” को अवश्य पूर्ण करेगी।

Leave a Comment

Your email address will not be published. Required fields are marked *

ADS Image

Scroll to Top