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गैस संकट पर केंद्र सरकार की नीतियां जिम्मेदार: डॉ. हरक सिंह रावत

गैस संकट पर केंद्र सरकार की नीतियां जिम्मेदार: डॉ. हरक सिंह रावत, मुख्यमंत्री विवेकाधीन कोष में अनियमितताओं के लगाए आरोप

 

देहरादून, 16 मार्च 2026।

उत्तराखंड कांग्रेस के चुनाव प्रबंधन समिति के अध्यक्ष और पूर्व कैबिनेट मंत्री डॉ. हरक सिंह रावत ने देश में बढ़ते एलपीजी गैस और तेल संकट को लेकर केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि देश में एलपीजी आपूर्ति को लेकर संकट जैसे हालात पैदा हो गए हैं, लेकिन सरकार इसे स्वीकार करने के बजाय जनता को गुमराह कर रही है।

 

 

डॉ. रावत ने कहा कि एक ओर सरकार गैस की कमी से इनकार कर रही है, वहीं दूसरी ओर गैस बुकिंग के बीच शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों के उपभोक्ताओं के लिए 25 और 45 दिन का अंतर तय कर दिया गया है। यह व्यवस्था खुद इस बात का संकेत है कि आपूर्ति में समस्या है। उन्होंने सवाल उठाया कि आखिर उपभोक्ताओं के बीच इस तरह का भेदभाव क्यों किया जा रहा है, जबकि गैस की जरूरत सभी को समान रूप से है।

 

उन्होंने बताया कि देहरादून सहित कई शहरों में ऐसी गैस एजेंसियां हैं, जो अब नगर निगम क्षेत्र में आती हैं, लेकिन पहले ग्रामसभा क्षेत्र में होने के कारण उन्हें ग्रामीण श्रेणी में रखा गया था। अब उन क्षेत्रों के पूरी तरह शहरी हो जाने के बावजूद उपभोक्ताओं को 45 दिन बाद बुकिंग की बाध्यता झेलनी पड़ रही है। उन्होंने मांग की कि ऐसे सभी गैस एजेंसियों को शहरी श्रेणी के बराबर सुविधा देते हुए 25 दिन की बुकिंग व्यवस्था लागू की जाए।

 

डॉ. रावत ने यह भी कहा कि गैस संकट के कारण सिलेंडरों की कालाबाजारी और जमाखोरी के मामले सामने आने लगे हैं, लेकिन सरकार और प्रशासन केवल बयानबाजी तक सीमित हैं।

 

उन्होंने केंद्र सरकार की विदेश और ऊर्जा नीति को भी इस संकट के लिए जिम्मेदार ठहराया। उनका कहना था कि वर्ष 2014 में जहां भारत लगभग 47 प्रतिशत गैस आयात करता था, वह अब बढ़कर लगभग 66 प्रतिशत हो गया है, जबकि तेल आयात 83 प्रतिशत से बढ़कर करीब 88 प्रतिशत तक पहुंच गया है। उन्होंने कहा कि देश में उत्पादन बढ़ाने के बजाय आयात पर निर्भरता बढ़ रही है।

 

डॉ. रावत ने आरोप लगाया कि पहले भारत ईरान और खाड़ी देशों से सस्ता और जल्दी मिलने वाला तेल और गैस खरीदता था, लेकिन अब अमेरिका के दबाव में नीति बदल दी गई है। खाड़ी देशों से आने वाले जहाज जहां 6–7 दिनों में पहुंच जाते थे, वहीं अमेरिका से आने वाले जहाजों को 55–60 दिन का समय लगता है, जिससे लागत बढ़ जाती है और इसका बोझ आम जनता पर पड़ता है।

 

प्रेस वार्ता के दौरान डॉ. रावत ने मुख्यमंत्री विवेकाधीन कोष के दुरुपयोग का मुद्दा भी उठाया। उन्होंने सूचना के अधिकार के तहत प्राप्त दस्तावेजों का हवाला देते हुए कहा कि उधम सिंह नगर और चंपावत जिलों के आंकड़े ही यह दिखाने के लिए पर्याप्त हैं कि इस कोष का किस प्रकार दुरुपयोग हो रहा है।

 

उन्होंने आरोप लगाया कि दोनों जिलों में भाजपा से जुड़े पदाधिकारियों और उनके परिजनों को हर साल मुख्यमंत्री विवेकाधीन कोष से बड़ी रकम दी जा रही है। उन्होंने कहा कि कुछ मामलों में बिना नाम या केवल पदनाम के आधार पर भी आर्थिक सहायता स्वीकृत की गई है, जो गंभीर अनियमितता को दर्शाता है।

 

डॉ. रावत ने कहा कि यदि पूरे प्रदेश के सभी जिलों के आंकड़े सामने आ जाएं तो यह उत्तराखंड के इतिहास का सबसे बड़ा भ्रष्टाचार साबित हो सकता है। उन्होंने मांग की कि मुख्यमंत्री विवेकाधीन कोष की निष्पक्ष और पारदर्शी जांच कराई जाए ताकि सच्चाई जनता के सामने आ सके।

 

प्रेस वार्ता में मुख्य प्रवक्ता गरिमा माहरा दसौनी, पूर्व महानगर अध्यक्ष लालचंद शर्मा, प्रदेश प्रवक्ता शीशपाल सिंह बिष्ट, वरिष्ठ नेता विनोद चौहान और श्रम प्रकोष्ठ के दिनेश कौशल भी मौजूद रहे।

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