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चार धाम यात्रा 2025: 72% श्रद्धालु पहले 60 दिनों में पहुंचे, एसडीसी रिपोर्ट में सुरक्षा और प्रबंधन पर जोर

देहरादून:
चार धाम यात्रा 2025 को लेकर एसडीसी फाउंडेशन की जारी रिपोर्ट में यात्रा के दौरान भीड़ के असमान वितरण, सुरक्षा चुनौतियों और प्रबंधन की कमियों को लेकर गंभीर चिंताएं सामने आई हैं। “पाथवेज टू पिलग्रीमेज: डेटा इनसाइट्स, चैलेंजेस एंड ऑपर्च्युनिटीज” शीर्षक से जारी इस रिपोर्ट का विमोचन देहरादून में प्रेस वार्ता के दौरान किया गया।

रिपोर्ट के अनुसार, वर्ष 2025 में कुल 51,06,346 श्रद्धालुओं ने चार धाम यात्रा की, जो 2024 की तुलना में 6.4 प्रतिशत अधिक है, लेकिन 2023 के आंकड़ों से कम है।

डेटा विश्लेषण में सामने आया कि 72 प्रतिशत श्रद्धालु पहले 60 दिनों में ही यात्रा पर पहुंचे। इनमें 34 प्रतिशत पहले 30 दिनों में और 38 प्रतिशत अगले 30 दिनों में पहुंचे, जिससे शुरुआती चरण में अत्यधिक भीड़ का दबाव बना।

मई और जून के महीनों में कुल 72 प्रतिशत श्रद्धालुओं का आगमन हुआ, जबकि मानसून के कारण जुलाई से सितंबर के बीच केवल 17 प्रतिशत ही श्रद्धालु पहुंचे। 4 से 10 जून का सप्ताह सबसे व्यस्त रहा, जब 5,47,084 श्रद्धालुओं ने दर्शन किए।

रिपोर्ट में यह भी बताया गया कि यात्रा के दौरान कुल 86 दिन ऐसे रहे जब किसी भी धाम में श्रद्धालु नहीं पहुंचे। यमुनोत्री और गंगोत्री में सबसे अधिक शून्य-श्रद्धालु दिवस दर्ज किए गए।

एसडीसी फाउंडेशन ने रिपोर्ट में यात्रा के दौरान सामने आई प्रमुख चुनौतियों का भी उल्लेख किया है, जिनमें अत्यधिक भीड़, कमजोर बुनियादी ढांचा, पर्यावरणीय क्षरण और उच्च हिमालयी क्षेत्रों में सुरक्षा जोखिम शामिल हैं।

हेलीकॉप्टर सेवाओं को लेकर भी रिपोर्ट में चिंता जताई गई है। 2025 की यात्रा के दौरान लगभग 6 सप्ताह में 5 हेलीकॉप्टर घटनाएं सामने आईं, जिनमें दो हादसों में करीब 13 लोगों की मौत हुई। गौरीकुंड के पास हुई दुर्घटना को विशेष रूप से गंभीर बताया गया है।

रिपोर्ट में सुझाव दिया गया है कि सरकार को रिकॉर्ड संख्या के बजाय सुरक्षित, डेटा-आधारित और सतत यात्रा प्रबंधन पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए। इसके साथ ही वहन क्षमता आधारित नियम, मजबूत आपदा प्रबंधन प्रणाली, बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं और पर्यावरण संरक्षण पर जोर देने की आवश्यकता बताई गई है।

एसडीसी फाउंडेशन ने यह भी कहा कि इस रिपोर्ट को संबंधित विभागों और नीति निर्माताओं को सौंपा जाएगा, ताकि भविष्य में यात्रा को अधिक सुरक्षित और व्यवस्थित बनाया जा सके।

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