Tranding

Date & Time
, |

ADS 500/50

SIR पर ‘सुप्रीम’ फैसला, कोर्ट ने कहा- कोई खामी नहीं

SIR पर सुप्रीम कोर्ट की मुहर, चुनाव आयोग को बड़ी राहत
कोर्ट बोला- प्रक्रिया में कोई खामी नहीं, देशभर में जारी रहेगा वोटर लिस्ट रिवीजन

SIR Process Update : देशातील १६ राज्ये आणि ३ केंद्रशासित प्रदेशांमध्ये  एसआयआर प्रक्रिया सुरू

नई दिल्ली। वोटर लिस्ट के स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) को लेकर चल रहे बड़े विवाद पर आज सुप्रीम कोर्ट ने अहम फैसला सुनाते हुए चुनाव आयोग को बड़ी राहत दी है। देश की सर्वोच्च अदालत ने साफ कहा कि SIR प्रक्रिया में कोई खामी नहीं है और यह चुनाव आयोग के अधिकार क्षेत्र में आता है। कोर्ट ने यह भी स्पष्ट कर दिया कि यह प्रक्रिया पूरे देश में पहले की तरह जारी रहेगी।

चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया (CJI) सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्या बागची की बेंच ने सुनवाई के दौरान कहा कि चुनाव आयोग ने पूरी कानूनी प्रक्रिया का पालन किया है। अदालत ने माना कि स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव लोकतंत्र की सबसे बड़ी जरूरत है और वोटर लिस्ट की शुद्धता बनाए रखना आयोग की जिम्मेदारी है।

सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि चुनाव आयोग के पास यह अधिकार है कि वह जांच के बाद किसी व्यक्ति का नाम वोटर सूची में शामिल करने से इंकार कर सकता है। कोर्ट ने माना कि आयोग की कार्रवाई संविधान और कानून के दायरे में है।

दरअसल, कई याचिकाओं में चुनाव आयोग की SIR प्रक्रिया को चुनौती दी गई थी। याचिकाकर्ताओं का कहना था कि यह प्रक्रिया संविधान के अनुच्छेद 326 और रिप्रेजेंटेशन ऑफ द पीपल एक्ट 1950 के तहत मिली शक्तियों से आगे जाती है।

विवाद की सबसे बड़ी वजह वह नियम बना, जिसमें 2002 या कुछ राज्यों में 2003 की वोटर लिस्ट में नाम नहीं होने पर मतदाता को अपने पुरखों का लिंक साबित करने को कहा गया था। याचिकाकर्ताओं ने दलील दी थी कि इससे गरीब, प्रवासी और पिछड़े वर्ग के असली वोटरों को परेशानी हो सकती है, क्योंकि उनके पास पुराने दस्तावेज उपलब्ध नहीं होते।

हालांकि सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने पारदर्शिता बढ़ाने और मतदाताओं की परेशानी कम करने के लिए कुछ अंतरिम निर्देश भी दिए थे। पहले आयोग ने सत्यापन के लिए 11 दस्तावेज तय किए थे, लेकिन बाद में कोर्ट के निर्देश पर आधार कार्ड को भी अतिरिक्त दस्तावेज के रूप में शामिल किया गया।

बता दें कि यह मामला तब शुरू हुआ था जब चुनाव आयोग ने पिछले साल जून में बिहार में SIR लागू करने का फैसला लिया था। बाद में इसे पश्चिम बंगाल, केरल, तमिलनाडु समेत कई राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों तक बढ़ाया गया।

चुनाव आयोग ने कोर्ट में अपना पक्ष रखते हुए कहा था कि इस प्रक्रिया का मकसद वोटर लिस्ट को साफ और शुद्ध बनाना है, ताकि डुप्लीकेट और अयोग्य मतदाताओं को हटाया जा सके।

करीब लंबी सुनवाई के बाद सुप्रीम कोर्ट ने 29 जनवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था, जिस पर आज अंतिम मुहर लग गई।

Leave a Comment

Your email address will not be published. Required fields are marked *

ADS Image

Scroll to Top