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महज 25 वर्ष की उम्र में राजनीति में रचा एक अलग मुकाम — दीप्ति रावत

राजनीति में पहचान बनाना आसान नहीं होता, लेकिन जब संकल्प मजबूत हो, नेतृत्व क्षमता हो और समाज के लिए कुछ करने का जज्बा हो, तो उम्र कभी बाधा नहीं बनती।

दीप्ति रावत जी इसका एक सशक्त उदाहरण हैं।

छात्र जीवन से ही उन्होंने सार्वजनिक जीवन और संगठनात्मक गतिविधियों में सक्रिय भूमिका निभानी शुरू कर दी थी। अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ABVP) से अपने राजनीतिक सफर की शुरुआत करने वाली दीप्ति रावत जी वर्ष 2002-03 में दिल्ली विश्वविद्यालय छात्र संघ (DUSU) की महासचिव निर्वाचित हुईं। इसके बाद उन्होंने संगठन में विभिन्न महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां संभालीं।

इसके बाद वर्ष 2007 में महज 25 वर्ष की उम्र में उन्होंने भारतीय जनता पार्टी के प्रत्याशी के रूप में उत्तराखंड की तत्कालीन बीरोंखाल विधानसभा सीट, जो वर्तमान में चौबट्टाखाल के नाम से जानी जाती है, से विधानसभा चुनाव लड़ा। इतनी कम उम्र में विधानसभा चुनाव लड़ना अपने आप में उनके साहस, राजनीतिक समझ और नेतृत्व क्षमता को दर्शाता है।

आज दीप्ति रावत जी भाजपा संगठन में महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां निभा रही हैं और महिला नेतृत्व को आगे बढ़ाने की दिशा में सक्रिय भूमिका निभा रही हैं। वर्तमान उपलब्ध जानकारी के अनुसार वे भाजपा महिला मोर्चा की राष्ट्रीय महामंत्री हैं।

छात्र राजनीति से लेकर राष्ट्रीय संगठन तक का यह सफर बताता है कि नेतृत्व उम्र का मोहताज नहीं होता।

25 साल की उम्र में विधानसभा चुनाव लड़ने वाली दीप्ति रावत जी आज भी युवाओं और विशेषकर महिलाओं के लिए यह संदेश हैं कि यदि लक्ष्य बड़ा हो और हौसला मजबूत हो, तो छोटी उम्र में भी बड़ी जिम्मेदारियां निभाई जा सकती हैं।

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