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पहलगाम हमले की सिहरन: “जब समय थम सा गया” में दर्ज दर्दनाक सच

देहरादून ,

सूचना एवं लोक संपर्क विभाग के संयुक्त निदेशक के.एस. चौहान द्वारा लिखी गई किताब *“जब समय थम सा गया”* पहलगाम में हुए आतंकी हमले के उनके प्रत्यक्ष अनुभवों पर आधारित एक बेहद मार्मिक दस्तावेज के रूप में सामने आई है। चौहान ने बताया कि 22 अप्रैल को हुई वह भयावह घटना आज भी उनके ज़हन में ताजा है और उसे याद करते ही रोंगटे खड़े हो जाते हैं, मानो उस दिन समय ठहर गया हो।

उन्होंने बताया कि इस दर्दनाक अनुभव को उन्होंने कुछ ही दिनों में शब्दों में ढालकर पुस्तक का रूप दिया, जिसमें उस रात की दहशत, मानवीय संवेदनाएं और घटनाक्रम को सजीव तरीके से प्रस्तुत किया गया है। यह किताब न सिर्फ एक व्यक्तिगत अनुभव है, बल्कि उस त्रासदी का साक्ष्य भी है जिसे कई लोगों ने करीब से महसूस किया।

इस दौरान चौहान ने हमले में जान गंवाने वाले पर्यटकों को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए गहरी संवेदना व्यक्त की।

 

वहीं, उन्होंने यह पुस्तक मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी को भेंट की। मुख्यमंत्री ने इस पहल की सराहना करते हुए कहा कि इस तरह की रचनाएं समाज को जागरूक करने के साथ-साथ इतिहास को संजोने का भी महत्वपूर्ण कार्य करती हैं।

 

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